नज़रों के सामने से ओंकारा का वो दृश्य घूमता है, जब अजय देवगन(ओमी) सैफ अली खान
(लंगड़ा त्यागी) की जगह विवेक ओबेरॉय(केसू फिरंगी) को अपना उत्तराधिकारी (बाहुबली)
घोषित कर देता है....सारी नाराज़गी और रंज़िश वहीं से शुरू होती है.....आखिर क्या वजह है
कि बहुत से माइलस्टोन को अपना उत्तराधिकारी नहीं मिल पाता तो कई जबरदस्ती वो चोगा
डालने को उतावले होते हैं....हश्र चाहे फिर चीर का चिथरा हो जाना ही हो...
जग को जीतने वाली जगजीतमयी आवाज़,आनंदमयी देवआनंद या फिर भोलेपन से दिल पर
राज करने वाले राजकपूर...क्या ऐसा नहीं लगता कि ये वो जूते छोड़ गए जिसके नाप के पांव
सदियों में बनते हैं....ये हस्तियां एक युग का निर्माण कर गए...जिसे अपनाने वाले बहुतेरे
आएंगे मगर कोई ऐसा जो उस व्यक्तित्व को जिन्दा कर दे....बहुत मुश्किल है... और अगर
कोई आ गया तो वो हकीकत में ‘उत्तराधिकारी’ को परिभाषित और पुष्ट करेगा...
सच कहूं तो आज के दौर में होड़ लगी है कि अपने पूर्वज की रोपी फसल काटो और योग्यता
के नाम पर चाहे आपके पास ठेंगा हो..चिल्ला चिल्ला कर खुद को उत्तराधिकारी साबित करो..
खुले तौर पर कुछ नाम लूंगा...अभिषेक बच्चन, विवेक ओबेरॉय,तुषार कपूर,....एक लम्बी
फेहरिस्त....अखिलेश यादव,तोजस्वी यादव,राहुल गांधी.... इन्होंने बस पेशा अपना कर समझ
लिया कि हो गए ये असनी उत्तराधिकारी....हालांकि ऊपर के सभी श्रीमान् अपने पिता के
योग्यता वाले दूरबीन से खुद को देखें तो दूर तक नजर नहीं आएंगे...फिर ये उतावले हो कर
आते क्यों हैं और शोर क्यों करते हैं...
खैर उत्तराधिकारी की बात चल रही है तो कुछ नाम आदर्श स्थिति में नजर आते हैं, जिन्होंने
वाकई उन्हें अपना उत्तराधिकारी बनाया/बताया या घोषित किया जिनकी प्रतिभा के वो खुद भी
कायल हैं....रतन टाटा को खुद से ज्यादा चमकदार भविष्य सायरस मिस्त्री का दिखा तो उन्हें
अपना उत्तराधिकारी घोषित करने में उन्होंने कोई हिचक नहीं की... ऐसा ही कुछ मैराडोना
और मैसी का रिश्ता है...मैराडोना को यकीन था कि ‘मैराडोना’ का बोझ उठाते हुए खुद को भी
स्थापित करना जैसा दुरूह काम मैसी ही कर सकते हैं इसलिए मैराडोना भी सीना ठोक कर उसे अपना
उत्तराधिकारी बताते हैं....
खैर ऐसी ही नई युगों का सफर चलता रहेगा जो असली उत्तराधिकारी को ढ़ूंढ़ेंगे...और ‘यात्रा’ भी चलती
रहेगी....